किसानों के लिए ‘मृदा स्वास्थय और कार्बन पृथक्करण’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

किसानों के लिए ‘मृदा स्वास्थय और कार्बन पृथक्करण’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

70 से अधिक किसानों ने लिया कार्यशाला में हिस्सा 

किसानों और हितधारकों को स्थायी और जलवायु अनुकूल खेती के लिए एकत्रित पोषक तत्व आपूर्ति प्रणाली के महत्व परं जागरूक करने के लिए एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फांउडेशन द्वारा ‘‘मृदा स्वास्थय और कार्बन पृथक्करण - जलवायु अनुकूल खेती का मार्ग’’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से लगभग 70 कृषकों सहित निति निर्धारकों, अधिकारिया और छात्रों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यशाला का उद्धाटन झांसी के रानी लक्ष्मी बाई सेंट्रल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर पदमश्री प्रो अरविंद कुमार, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान, कृषि अनुसंधान भवन के कृषि विस्तार प्रभाग के सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार) डा रंजय कुमार सिंह, एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती, इफको एनसीआर के सीनियर फील्ड ऑफिसर नवीन और एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फांउडेशन की महानिदेशक डा नूतन कौशिक द्वारा किया गया।

कार्यशाला का उद्धाटन झांसी के रानी लक्ष्मी बाई सेंट्रल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर पदमश्री प्रो अरविंद कुमार ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाआ से हम किसानो ंको आधुनिक कृषि जानकारी, तकनीकी को प्रदान करते हुए उनकी आय को बढ़ा सकते है। हमने प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करके अन्न का उत्पादन को बढ़ा लिया है किंतु हमने पर्यावरण को प्रभावित किया है और अन्न की गुणवत्ता को भी कमजेार किया है। पिछले 10 सालों में 100 मिलियन टन खाद्याान्न का उत्पादन बढ़ाया है। आज कई देशों मे ंअन्न निर्यात कर रहे है किंतु रसायनिक खाद्यों के अंधाधुध प्रयोग ने पोषक तत्व गुणवत्ता सहित मृदा के स्वास्थय को प्रभावित किया है जिसके फलस्वरूप अधिकतर महिलाओं और बच्चों में रक्त की कमी है। प्रो कुमार ने कहा कि कार्बन पृथक्करण, मुदा स्वास्थय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है इसलिए पुनयोर्जी कृषि पर ध्यान देना चाहिए। खादों के प्रयोग में संतुलन बनाना आवश्यक है, नई किस्मों का उपयोग करे और सरकारी एजेंसियों, एमिटी विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के संर्पक में रहे और मार्गदर्शन प्राप्त करें।

एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान ने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है और आप किसानों के कारण हम विश्व में कृषि में अग्रणी स्थान पर खड़े है। कृषि में मुदा स्वास्थय को लेकर चुनौतियों से हम सभी को मिलकर निपटना होगा जिसमें एमिटी के वैज्ञानिकों का अनुसंधान, आपको दिया जाने वाला प्रशिक्षण, आपका कार्य, निती निर्धारकों द्वारा निती का निर्माण आदि शामिल है। वर्तमान में कार्बन पृथक्करण के जरीए जलवायु अनुकूल खेती का मार्ग बेहद महत्वूपूर्ण हैं और एमिटी सदैव आपके सहयोग हेतु तैयार है।

कृषि अनुसंधान भवन के कृषि विस्तार प्रभाग के सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार) डा रंजय के सिंह ने कहा कि मृृदा और कार्बन का सीधा सबंध जलवायु अनुकूलन से है। प्राचीन समय से हमारे समाज मे मृृदा को जीवित रूप मेे देखा गया है। जलवायु परिवर्तन का अर्थ केवल जलवायु तक सीमीत नही है किसानो ंके लिए सूखा, बाढ़ और तापमान की बढ़त तनाव पैदा करता है जिसका असर मृदा स्वास्थय पर पड़ता है। उन्होनें कहा कि आपको मृदा कार्बन पृथक्करण की पद्धतियों को अपनाना होगा। इसके अतिरिक्त उन्होने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एग्रीस्टेक पॉलीसी, प्राकृतिक खेती सहित प्रथम पंक्ती प्रदर्शन, अकाशा, एमओएम आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब आजादी के बाद देश मे अन्न का आभाव था और हमें दूसरे देशों से अन्न आयात करना पड़ता था। आप कृषकों, सरकारी नितियों, उन्नत तकनीकों के सहायता से आज हम खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर है और बल्कि अन्य देशों को अन्न निर्यात भी कर रहे है। एमिटी सदैव किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई तकनीक को उन्नत करने और उनको प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए कार्य करता है और आज आयोजित इस कार्यशाला का उददेश्य आपको मृदा स्वास्थय को मजबूत बनाने के लिए जानकारी देने के लिए आयोजित की गई है।

इफको एनसीआर के सीनियर फील्ड ऑफिसर श्री नवीन ने कहा कि इफको द्वारा स्न 2010 से मृदा स्वास्थय के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है जिसके लिए विभिन्न जिलों मे निशुल्क मृदा परिक्षण की मोबाइल वैन का संचालन और सेंटर स्थापित किये गये है। आज मृदा को स्वास्थय को मजबूत बनाते हुए किसानों की आय को बढ़ाने की आवश्यकता है जिसमें सभी हितधारकों का सहयोग आवश्यक है।

एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फांउडेशन की महानिदेशक डा नूतन कौशिक ने कृषको और अधिकारीयों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्यशाला ने केवल छात्रों को स्थायी कृषि, मिट्टी के स्वास्थ्य और जलवायु अनूकुलन में नई अवधारणाओं से परिचित कराएगी, साथ ही उन्हें वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स के साथ बातचीत करने का मौका भी देगी। दूसरी ओर, किसानों को एकीकृत पोषण तत्व प्रबध्ंान, संतुलित खाद और मिट्टी में कार्बन जमा करने की तकनीकों के बारे में प्रयोगिक जानकारी प्राप्त हुई जिससे पैदावार बढ़ सकती है, लागत कम हो सकती है और जलवायु अनुकूलन बेहतर हो सकती है। यह कार्यशाला किसानों को सरकारी और इंडस्ट्री की पहलों, नई टेक्नोलॉजी और बाज़ार से जुड़े तरीकों के बारे में जानने के लिए एक मंच भी प्रदान करती है, जिससे स्थायी और जलवायु स्मार्ट खेती के लिए अनुसंधान, विस्तार और फील्ड में इस्तेमाल के बीच संबंध मज़बूत होता है।

इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रिसिंपल वैज्ञानिक डा टी जे पुरकायस्थ और एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा चंद्रदीप टंडन ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर किसानों ने विशेषज्ञों से कई प्रश्न भी किये।