विदुषी सविता देवी की छठी पुण्यतिथि पर शिष्यों एवं संगीत प्रेमियों ने दी संगीतमय श्रद्धांजलि
नई दिल्ली: भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुप्रसिद्ध गायिका, बनारस घराने की विदुषी सविता देवी की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर उनके शिष्यों, शास्त्रीय संगीत प्रेमियों तथा श्रीमती सिद्धेश्वरी देवी संगीत अकादमी के सदस्यों ने शनिवार, 20 दिसंबर 2025 को त्रिवेणी सभागार, मंडी हाउस में एक संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की।
विदुषी सविता देवी, पद्मश्री श्रीमती सिद्धेश्वरी देवी, जिन्हें विश्वभर में “ठुमरी की रानी” के रूप में जाना जाता है, की सुपुत्री थीं। इस अवसर पर उनके भारतीय शास्त्रीय संगीत में अमूल्य योगदान तथा बनारस घराने की परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन हेतु उनके आजीवन समर्पण को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
इस स्मृति-संध्या में शहर भर से आए 200 से अधिक संगीत प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पद्मश्री विदुषी रीता गांगुली, सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका, तथा विशिष्ट अतिथि पद्मभूषण डॉ. अशोक सेठ, चेयरमैन, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अकादमी के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण गुरु वंदना से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को श्रद्धा और साधना से भर दिया। इसके पश्चात लघु ऑडियो-विज़ुअल प्रस्तुतियों के माध्यम से विदुषी सविता देवी के जीवन, संगीत यात्रा और कलात्मक विरासत की झलकियां प्रस्तुत की गईं। विदुषी रीता गांगुली ने विदुषी सविता देवी तथा उनकी माता श्रीमती सिद्धेश्वरी देवी के साथ अपने आत्मीय संस्मरण साझा किए, जिससे श्रोता शुद्ध, अनुशासित और समर्पित संगीत के उस स्वर्णिम युग में लौट गए।
इसके बाद युवा एवं प्रतिभाशाली गायिका विदुषी आस्था गोस्वामी ने राग बागेश्री की मनोहारी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने विदुषी सविता देवी को समर्पित एक भावपूर्ण ठुमरी के साथ अपनी प्रस्तुति का समापन किया। उनके साथ तबले पर उस्ताद अख्तर हसन, सारंगी पर श्री घनश्याम सिसोदिया तथा हारमोनियम पर श्री राजेंद्र बनर्जी ने संगत की।
कार्यक्रम का समापन प्रख्यात कथक कलाकार, महान कथक गुरु पंडित बिरजू महाराज के सुपुत्र, पं. दीपक महाराज की मनोहारी कथक प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने तीनताल की जटिल रचनाओं, ठुमरी पर आधारित भाव-अभिनय, प्रसिद्ध मयूर (मोर) नृत्य सहित कथक की पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ स्वर में श्री ऋषभ जोशी, तबले पर उस्ताद जाकिर हुसैन वारसी, सारंगी पर गुलाम वारिस, सितार पर श्री सलीम कुमार तथा हारमोनियम पर श्री बल्लू ख़ान ने संगत की।
इस अवसर पर अजेय महाराज, प्रबंध निदेशक, श्रीमती सिद्धेश्वरी देवी संगीत अकादमी, ने कहा, “अकादमी विदुषी श्रीमती सिद्धेश्वरी देवी और विदुषी सविता देवी की समृद्ध संगीत परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इन वार्षिक आयोजनों के माध्यम से हम न केवल अपने गुरुओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और विशेष रूप से ठुमरी जैसी सशक्त विधा को नई पीढ़ी और आम जनमानस तक पहुँचाने का प्रयास भी करते हैं।”
श्रीमती अंजना महाराज, अध्यक्ष, स्मृति सिद्धेश्वरी देवी भारतीय संगीत अकादमी ने कहा, “हम अपनी मुख्य अतिथि विदुषी रीता गांगुली जी, विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक सेठ जी तथा सभी सम्मानित अतिथियों, कलाकारों, शिष्यों और अकादमी के सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। उनकी गरिमामयी उपस्थिति और सहयोग से हमें अपने गुरुओं की समृद्ध विरासत और भारतीय शास्त्रीय संगीत की शाश्वत परंपराओं को निरंतर संजोए रखने की प्रेरणा और शक्ति मिलती है।”
विदुषी सविता देवी बनारस घराने की एक प्रतिष्ठित संगीत परंपरा से संबंध रखती थीं। वे ठुमरी, दादरा, होरी, चैती, कजरी और टप्पा जैसी शैलियों की अप्रतिम गायिका थीं और ‘पूरब अंग’ की इस परंपरा को उन्होंने नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं, जिसे उनकी माता श्रीमती सिद्धेश्वरी देवी ने विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया था। दिसंबर 2019 में अल्पकालिक अस्वस्थता के बाद उनका निधन हो गया, परंतु उनकी संगीत विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है।


