युवा मिसाइल मैन प्रखर विश्वकर्मा को मिला 'यंगेस्ट पार्टिसिपेंट' अवार्ड 

युवा मिसाइल मैन प्रखर विश्वकर्मा को मिला 'यंगेस्ट पार्टिसिपेंट' अवार्ड 

टीकमगढ़ के 'युवा मिसाइल मैन' प्रखर विश्वकर्मा को अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी ने 'यंगेस्ट पार्टिसिपेंट' अवार्ड से नवाजा
30 से ज्यादा देशों के लिए रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट डिजाइन कर चुके हैं प्रखर, 'विराट सेफ' प्रोजेक्ट की दुनिया भर में चर्चा

टीकमगढ़ जिले के पलेरा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम लरौन के निवासी प्रखर विश्वकर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और देश का नाम रोशन किया है। अमेरिका के डेनवर (Colorado, USA) में अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी (APS) द्वारा आयोजित 7-दिवसीय 'ग्लोबल फिजिक्स समिट 2026' में प्रखर को आधिकारिक तौर पर 'यंगेस्ट पार्टिसिपेंट' (सबसे युवा प्रतिभागी) के रूप में सम्मानित किया गया है।

महज 19 वर्ष की आयु में प्रखर की उपलब्धियां हैरान करने वाली हैं। एयरोस्पेस, डिफेंस और स्पेस साइंस जैसे जटिल विषयों में उनके नाम 300 से अधिक नेशनल और इंटरनेशनल सर्टिफिकेशंस दर्ज हैं। वे अब तक दुनिया के 30 से अधिक देशों के लिए रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट डिजाइनिंग के जटिल प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर चुके हैं। उनकी इसी प्रतिभा के कारण उन्हें रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक उभरते हुए वैज्ञानिक के रूप में देखा जा रहा है। इस ग्लोबल समिट में प्रखर ने अपना स्वदेशी प्रोजेक्ट 'VIRAAT SAFE' (Virtual Defence System) प्रस्तुत किया। समिट में उपस्थित दुनिया भर के भौतिक वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने प्रखर के इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे रक्षा क्षेत्र का भविष्य बताया।

प्रखर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पंजीकृत 'स्पेस ट्यूटर' भी हैं, जो सैकड़ों युवाओं को रॉकेट्री और एस्ट्रोनॉमी की शिक्षा दे रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में उनके द्वारा विकसित किए जा रहे 'प्रोजेक्ट रैम' और स्वदेशी ड्रोन्स के कारण उन्हें प्रदेश में 'मिसाइल मैन' के नाम से भी पहचान मिल रही है। प्रखर ने अपनी इस बड़ी सफलता का श्रेय अपने पिता श्री रघुनंदन विश्वकर्मा, माता श्रीमती अरुण कुमारी और बंसल संस्थान के डायरेक्टर डॉ. दामोदर तिवारी को दिया है। डॉ. दामोदर तिवारी ने प्रखर की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए इसे संस्थान और पूरे देश के लिए गौरव का विषय बताया। प्रखर वर्तमान में भोपाल के बंसल इंस्टीट्यूट से मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहे हैं और उनका लक्ष्य भारत को रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना है।