मालवाहक वाहनों की नो एंट्री से 30 हजार उद्योगों पर बुरा होगा असर : सुरेंद्र सिंह नाहटा
नोएडा। जनपद के 33 मार्गों पर भारी/मध्यम के बाद अब हल्के मालवाहक वाहनों की नो एंट्री का नया नियम लागू कर दिया गया है। नए नियम से जनपद के 30 हजार उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। आने वाले दिनों में इसका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी दिख सकता है। उद्योगों की इस समस्या को एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने प्रमुखता से उठाया है। इस संबंध में पुलिस उपायुक्त यातायात को पत्र लिखकर उद्योगों के हित में नियमों में बदलाव करने की मांग उठाई गई है।
एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा ने बताया कि मार्च 2021 में जनपद के 25 मार्गों पर भारी वाहनों की नो एंट्री का नियम लागू किया गया था। बाद में 18 जून 2023 को प्रतिबंधित मार्गों की संख्या बढ़ाकर 33 कर दी गई। पुराने नियम के तहत नो एंट्री का समय सुबह 7 से 10 बजे निर्धारित था, जिसे बढ़ाकर सुबह 11 बजे तक कर दिया गया था। यातायात पुलिस के इस फैसले ने उद्योगों की परेशानी पहले ही बढ़ाकर रखी हुई थी। अब नए नियमों के अंतर्गत बीते बुधवार से हल्के मालवाहक वाहनों पर भी नो एंट्री का नियम लागू कर दिया गया है। मसलन, सुबह 7 से 11 बजे और शाम 5 से रात 10 बजे तक किसी भी प्रकार के मालवाहक वाहन जिले की सड़कों पर नहीं चल सकेंगे।
यह फैसला उद्योगों की परेशानी बढ़ाने वाला है। नियमों के अंतर्गत शहर के उन आंतरिक मार्गों को भी शामिल किया गया है जो औद्योगिक सेक्टरों के बीच से होकर गुजरते हैं। इनमें प्रमुख रूप से सेक्टर-14ए फ्लाईओवर से झुंडपुरा तिराहे को जोड़ने वाला उद्योग मार्ग, सेक्टर-दो व तीन तिराहे से हरौला बांस बल्ली मार्केट होकर शिवानी फर्नीचर चौराहा, जलवायु विहार चौराहे से शिवानी फर्नीचर होकर झुंडपुरा तिराहा, एमपी-01 मार्ग डीएनडी चौक से सेक्टर-12-22-56 तिराहा सहित ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े अन्य मार्ग शामिल हैं। बता दें कि, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की स्थापना औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने के उदेश्य से की गई थी। उक्त औद्योगिक सेक्टरों के आंतरिक मार्गों पर नो एंट्री लागू होने से औद्योगिक गतिविधियों पर विपरीत असर पड़ रहा है।
सेक्टर-1 से लेकर 11 तक बसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 की हजारों छोटी-छोटी इकाइयों के बीच कच्चे व तैयार माल की आपूर्ति बाधित होने और तैयार माल के वितरण में भारी अवरोध उत्पन्न हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन प्रक्रिया धीमी हो गई है। समय पर डिलीवरी न होने से व्यापारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के रास्ते दूसरे राज्यों से कच्चा माल जनपद की औद्यागिक इकाइयों में पहुंचता है। ऐसे 24 घंटे में से 9 घंटे तक भारी वाहनों की आवाजाही बंद रहने से औद्योगिक उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है, जिसका असर प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।
संस्था ने औद्योगिक क्षेत्र के बीच से गुजर रहे आंतरिक मार्गों को नो एंट्री के दायरे से बाहर रखने और शहर की आउटर सड़कों पर ही नो एंट्री का नियम लागू किए जाने की मांग उठाई है। साथ ही, नो एंट्री के नियम लागू कराने के लिए चेकिंग के नाम पर उद्योगों का उत्पीड़न और उत्पादन प्रभावित न हो, इसकी निगरानी के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए जाने पर भी जोर दिया है।
आपका
सुरेंद्र सिंह नाहटा
जिला अध्यक्ष, एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन नोएडा


