महिलाओं के बालों की अंदरूनी सेहत की ट्राया हैल्थ ने खोली परतें
हर राज्य में बाल झड़ने की वजहें अलग, स्टडी में सामने आया फर्क
देशभर की 3,80,363 महिलाओं पर हुई इस स्टडी में तनाव, नींद और पेट की सेहत को बाल झड़ने के पैटर्न के साथ जोड़कर देखा गया। साथ ही यह भी परखा गया कि अलग-अलग क्षेत्रों में इन तीनों का स्तर कितना अलग है।
दिल्ली, 4 नवंबर 2026: ट्राया हैल्थ ने आज अपनी 'फीमेल हेयर हैल्थ स्टडी' के नतीजे सबके सामने रखे। पूरे भारत की 3,80,363 महिलाओं के आंकड़ों पर टिकी इस स्टडी में तनाव का स्तर, नींद की क्वालिटी, पाचन की सेहत और बाल गिरने के तरीके की जांच हुई। नतीजों में दिखा कि बाल झड़ने से परेशान महिलाओं में तनाव, नींद की कमी और पेट की समस्याएं ज्यादा आम हैं। बाल पतले होने या मांग चौड़ी होने की शिकायत वाली महिलाओं में ये तीनों वजहें खास तौर पर प्रमुख रहीं।
इन नतीजों पर ट्राया की राय साफ है: तनाव, नींद और पाचन, तीनों बाल झड़ने के जाने-माने जैविक कारण हैं और तीनों का काम करने का अपना अलग, भलीभांति दर्ज तरीका है। लंबे समय का तनाव कोर्टिसोल को बढ़ाता है, जिससे बालों के बढ़ने की अवधि घट जाती है। कमजोर नींद रात में रोम कूपों की मरम्मत को रोकती है। पाचन में गड़बड़ी आयरन, विटामिन डी और ज़िंक जैसे उन पोषक तत्वों के सोखे जाने में बाधा डालती है, जो रोम कूपों के विकास के लिए जरूरी हैं।
इसके बावजूद ज्यादातर महिलाएं इस समस्या का हल तेल, शैम्पू और ऊपर से लगाए जाने वाले उपचारों में खोजती हैं। यह स्टडी बताती है कि बालों के पीछे शरीर के भीतर असल में क्या हो रहा है।
इस स्टडी की खास बातें
● स्टडी की 95.8 प्रतिशत महिलाओं में बाल झड़ना साफ तौर पर नजर आया।
● बाल पतले होना सबसे आम पैटर्न रहा (53.7 प्रतिशत)। उसके बाद मांग चौड़ी होना (22.1 प्रतिशत) और साइड से बाल पतले होना (19.1 प्रतिशत) रहे।
● 52 प्रतिशत महिलाओं का तनाव मध्यम या ऊंचे स्तर का है, 38.1 प्रतिशत की नींद ठीक से पूरी नहीं होती, और 51.7 प्रतिशत को पेट की परेशानियां हैं।
● 46.6 प्रतिशत महिलाएं इन तीन में से दो या ज्यादा दिक्कतों का सामना कर रही हैं, और हर 6 में से 1 महिला (16.4 प्रतिशत) तीनों से प्रभावित है।
● साइड से बाल पतले होने या मांग चौड़ी होने वाली महिलाओं में, सामान्य रूप से बाल पतले होने वाली महिलाओं की तुलना में तनाव, नींद की कमी और पेट की समस्या ज्यादा मिली।
भीतरी सेहत का हाल
तनाव
स्टडी की 52 प्रतिशत महिलाएं मध्यम से तेज तनाव में हैं, और हर 4 में से 1 से ज्यादा (25.3 प्रतिशत) लगभग रोज तनाव महसूस करती हैं। लंबे समय तक रहने वाला तनाव बाल झड़ने का जाना-माना जैविक कारण है। शरीर के मुख्य तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के बढ़ने पर बालों की सक्रिय विकास अवधि छोटी हो जाती है और रोम कूप समय से पहले आराम की अवस्था में चले जाते हैं। लगातार तनाव एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन को भी बिगाड़ सकता है, जो बालों की बढ़त को सहारा देता है और रोम कूपों को सुरक्षित रखता है। इन हार्मोनों में गड़बड़ी होने पर बाल झड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
इसका असर धीरे-धीरे दिखता है। तनाव से बाल अचानक नहीं झड़ते, बल्कि कई महीनों तक तनाव जमा होता है और फिर बाल झड़ना शुरू होता है। बदलाव धीमा होने की वजह से ज्यादातर महिलाएं अपने तनाव और बालों की समस्या के बीच कड़ी नहीं जोड़ पातीं।
नींद
स्टडी की 38.1 प्रतिशत महिलाएं ठीक से सो नहीं पा रहीं। खराब नींद भी बाल झड़ने का जाना-माना जैविक कारण है। गहरी नींद में शरीर ग्रोथ हार्मोन छोड़ता है, जो रोम कूपों की कोशिकाओं के नवीनीकरण के लिए जरूरी है। रात की नींद बार-बार टूटे तो मरम्मत का वक्त घट जाता है। जिन रोम कूपों की पूरी मरम्मत नहीं होती, वे हर चक्र के साथ पतले और कमजोर बाल बनाते हैं। वक्त के साथ बालों का घनापन कम होता जाता है और बाल धीरे-धीरे, दूर-दूर तक झड़ने लगते हैं। ज्यादातर महिलाएं इसे तनाव या उम्र का असर समझ लेती हैं, जबकि बरसों से बढ़ती नींद की कमी को कारण के रूप में लगभग कभी नहीं पहचाना जाता।
पाचन
स्टडी की 51.7 प्रतिशत महिलाओं को पेट की तकलीफें हैं, जैसे एसिडिटी, पेट फूलना (ब्लोटिंग), गैस या कब्ज़।
जिन पोषक तत्वों पर रोम कूप निर्भर रहते हैं, वे आंतों में ही सोखे जाते हैं। पाचन ठीक न हो तो खाना पर्याप्त होने के बावजूद इनका अवशोषण कम हो सकता है। कोई महिला अच्छा खाती हो और सप्लीमेंट भी लेती हो, फिर भी अगर उसकी आंतें पोषण को सही ढंग से प्रोसेस नहीं कर रहीं, तो रोम कूपों में पोषण की कमी हो सकती है। महिलाओं में बाल झड़ने की सबसे आम, मगर सबसे कम पहचानी जाने वाली वजहों में से एक आयरन की कमी है, जो अक्सर अनदेखी रह जाती है क्योंकि पेट से इसके संबंध की जांच कभी होती ही नहीं।
सलोनी आनंद, सह-संस्थापक, ट्राया हैल्थ
"बालों का झड़ना इस बात का संकेत है कि शरीर के भीतर कुछ गड़बड़ है। मैंने हजारों महिलाओं से बात की है, जो भीतर देखने के बजाय किसी चमत्कार की उम्मीद में बार-बार प्रोडक्ट्स और सप्लीमेंट्स बदलती रहती हैं। उनमें से लगभग किसी को भी नहीं बताया गया कि उनका स्ट्रेस, उनकी नींद या उनकी गट हैल्थ उनके बालों से जुड़ी है। भारत में यह बात लंबे समय से उठी ही नहीं। यह स्टडी इसी बातचीत को शुरू करने की हमारी कोशिश है।"
तीनों वजहों की आपसी कड़ी
तनाव, नींद और पाचन एक-दूसरे से अलग नहीं चलते, ये आपस में असर डालते हैं। तनाव नींद बिगाड़ता है, और कम नींद कोर्टिसोल को ऊंचा बनाए रखती है, जिससे हार्मोन असंतुलित होते हैं और बालों की बढ़त पर असर पड़ता है। पेट और दिमाग एक-दूसरे को संकेत भेजते हैं, इसलिए पेट की परेशानी और तनाव एक-दूसरे को और बढ़ा सकते हैं, जबकि कमजोर अवशोषण से रोम कूपों तक जरूरी पोषण नहीं पहुंच पाता। स्टडी में ये तीनों अक्सर साथ मिले। 46.6 प्रतिशत महिलाओं में इनमें से दो या ज्यादा मौजूद थे।
बाल ज्यादा झड़ें, तो भीतरी बोझ भी ज्यादा
स्टडी में महिलाओं को उनके बाल झड़ने के पैटर्न और भीतरी सेहत के संकेतकों, दोनों के आधार पर देखा गया। बाल पतले होने वाली महिलाएं, जो सबसे बड़ा समूह हैं, तीनों संकेतकों पर राष्ट्रीय औसत से थोड़ा नीचे रहीं। जबकि साइड से बाल पतले होने या मांग चौड़ी होने वाली महिलाएं तीनों पर औसत से ऊपर रहीं।
● बाल पतले होना (53.7% महिलाएं): तनाव 51.4%, नींद की कमी 37.5%, पेट की समस्या 50.1%
● साइड से पतले होना (19.1% महिलाएं): तनाव 54.2%, नींद की कमी 39.2%, पेट की समस्या 54.6%
● मांग चौड़ी होना (22.1% महिलाएं): तनाव 53.6%, नींद की कमी 39.6%, पेट की समस्या 54.1%
● राष्ट्रीय औसत: तनाव 52.0%, नींद की कमी 38.1%, पेट की समस्या 51.7%
साइड से पतले होने या मांग चौड़ी होने वाली महिलाओं में तनाव, खराब नींद और पेट का बोझ, बाल पतले होने वाली महिलाओं से ज्यादा मिला। फर्क 2 से 4 अंक का ही है, पर हर संकेतक पर एक जैसा है। ट्राया में भी यही दिखता है कि इन पैटर्न वाली महिलाओं पर भीतरी दबाव अधिक रहता है।
किस राज्य में क्या तस्वीर?
(तनाव / नींद की कमी / पेट की समस्या)
● महाराष्ट्र: 52.8% / 41.1% / 52.4%
● कर्नाटक: 51.5% / 40.0% / 49.4%
● उत्तर प्रदेश: 50.1% / 34.7% / 53.2%
● तेलंगाना: 53.7% / 42.1% / 44.1%
● दिल्ली: 51.7% / 37.3% / 56.0%
● पश्चिम बंगाल: 57.7% / 39.3% / 58.7%
● गुजरात: 51.5% / 35.6% / 50.1%
● तमिलनाडु: 55.6% / 43.1% / 45.4%
● मध्य प्रदेश: 50.4% / 34.3% / 50.0%
● बिहार: 47.5% / 32.6% / 51.9%
● राजस्थान: 48.9% / 31.1% / 50.8%
● ओडिशा: 52.5% / 35.5% / 54.9%
● राष्ट्रीय औसत: 52% / 38.1% / 51.7%
पश्चिम बंगाल: यहां तनाव (57.7%) और पेट की समस्या (58.7%), दोनों किसी भी राज्य से ज्यादा हैं। तनाव राष्ट्रीय औसत से 5.7 अंक और पेट की समस्या 7 अंक ऊपर है। लगभग 10 में से 6 महिलाओं को पेट की परेशानी है, जिससे रोम कूपों तक पोषक तत्व पहुंचने में रुकावट आ सकती है। तनाव उन हार्मोनों को बिगाड़ता है जो बालों को बचाते हैं, और बंगाल में दोनों एक साथ औसत से काफी ऊपर हैं।
तमिलनाडु: नींद की स्थिति यहां सबसे खराब है। 43.1 प्रतिशत महिलाएं ठीक से नहीं सो पातीं, जो राष्ट्रीय औसत से 5 अंक ज्यादा और किसी भी राज्य में सबसे ऊंचा आंकड़ा है। तनाव भी 55.6 प्रतिशत के साथ औसत से 3.6 अंक ऊपर है। खराब नींद रात की उस मरम्मत को कमजोर करती है जिस पर रोम कूप टिके हैं, और तनाव उन हार्मोनों को बिगाड़ता है जो रोम कूपों को विकास चरण में रखते हैं। तमिलनाडु में दोनों एक साथ औसत से ऊपर हैं।
तेलंगाना: यहां तनाव और नींद, दोनों राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं। तनाव 53.7 प्रतिशत (1.7 अंक ज्यादा) है और नींद की कमी 42.1 प्रतिशत (4 अंक ज्यादा), जो किसी भी राज्य में दूसरा सबसे ऊंचा आंकड़ा है। तनाव नींद में खलल डालता है, और खराब नींद कोर्टिसोल को चढ़ा हुआ रखकर हार्मोन का संतुलन बिगाड़ती है, जिसका असर बालों की बढ़त पर पड़ता है।
दिल्ली: पेट की समस्या के मामले में दिल्ली, पश्चिम बंगाल के बाद दूसरे नंबर पर है। यहां 56.0 प्रतिशत महिलाओं को पेट की परेशानी है, जो राष्ट्रीय औसत से 4.3 अंक ज्यादा है। पेट की दिक्कत आयरन, विटामिन डी और प्रोटीन के अवशोषण पर असर डाल सकती है। कोई महिला अच्छा खाए और नियमित सप्लीमेंट ले, फिर भी अगर आंतें पोषण को ठीक से नहीं सोख रहीं, तो नतीजे नहीं दिखेंगे। दिल्ली में यह आंकड़ा हर 2 में से 1 से ज्यादा महिला का है।
ट्राया की समझ
हर 4 में से 1 से ज्यादा महिला (25.3 प्रतिशत) लगभग रोजाना तनाव महसूस करती है। 38.1 प्रतिशत ठीक से सो नहीं पातीं, और आधे से ज्यादा को पेट की समस्याएं हैं। लगभग आधी महिलाएं तीन में से दो या अधिक समस्याओं से जूझ रही हैं, और यह बोझ उन महिलाओं पर ज्यादा है जिनके बाल साइड से या मांग के पास से झड़ रहे हैं।
बाल झड़ने से परेशान ज्यादातर भारतीय महिलाएं इसका इलाज ऊपरी स्तर पर ही कर रही हैं, जबकि यह स्टडी भीतर की तरफ इशारा करती है। तनाव पर ध्यान देना जरूरी है, नींद का ख्याल रखना होगा, और पेट की जांच करानी होगी, क्योंकि जब तक पोषक तत्वों के अवशोषण की कमी पकड़ी और दुरुस्त नहीं की जाती, रोम कूपों को जरूरी पोषण नहीं मिल पाएगा।
ट्राया में हम भीतरी जांच से शुरुआत करते हैं और स्कैल्प (सिर की त्वचा) के उपचार के साथ-साथ उसका समाधान करते हैं।


